अतीत की सुरंग से
*अतीत की सुरंग से*
अतीत की सुरंग से कुछ यादें निकाल लाई हूं,
कुछ सुनहरी ख्वाबों सी पिटारी ढूंढ लाई हूं,
गमों- खुशियों के पल जो छुपे थे गहराइयों में,
उन्हें अतीत से वर्तमान का निमंत्रण दे आई हूं।
अतीत के सुरंग से स्वपनों कि खंडहर देख आई हूं,
वो ईतिफाकों का था जो सिलसिला,
तानो और दुखों का था जो समंदर,
गमों की तन्हाइयों का था जो वो मंजर,
खुशियों के थे जो वो सुनहरे पल
अतीत की सुरंग की गहराइयों में,
उनमें से कुछ पल अतीत से मांग लाई हूं ।
श्रीमती मुक्ता सिंह
रंका राज
14/5/2020
अतीत की सुरंग से कुछ यादें निकाल लाई हूं,
कुछ सुनहरी ख्वाबों सी पिटारी ढूंढ लाई हूं,
गमों- खुशियों के पल जो छुपे थे गहराइयों में,
उन्हें अतीत से वर्तमान का निमंत्रण दे आई हूं।
अतीत के सुरंग से स्वपनों कि खंडहर देख आई हूं,
वो ईतिफाकों का था जो सिलसिला,
तानो और दुखों का था जो समंदर,
गमों की तन्हाइयों का था जो वो मंजर,
खुशियों के थे जो वो सुनहरे पल
अतीत की सुरंग की गहराइयों में,
उनमें से कुछ पल अतीत से मांग लाई हूं ।
श्रीमती मुक्ता सिंह
रंका राज
14/5/2020

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