अगर मगर की बातें छोड़ो


     *अगर मगर की बातें छोड़ो*
अगर मगर की बातें छोड़ो, मुद्दे पे आते हैं हम
मैंने क्या कमी की,जो तुमने दी इतनी बड़ी सजा
मेरा गुनाह बस इतना है ये मेरी जाने वफ़ा
कि कल भी तुम्हे चाहते थे, आज भी करते हैं सजदा।


श्रीमती मुक्ता सिंह
रंका राज
19/5/2020


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