परछाइयां उभरती है

         *परछाइयां उभरती है*
कितनी परछाइयां उभरती है जेहन में तेरे
तेरे प्यार की कुछ आडी सी कुछ तिरछी सी
जैसे किसी झील में लहरों की मोहताज हो
अक्स।

श्रीमती मुक्ता सिंह
रंका राज
20/5/2020


Comments