कहां तक

#कहां तक#
कहां तक चलेगा ये साथ हमारा,
तुम खामोश सागर,मै बेबस किनारा,
आते हो मिल कर लौट जाते हो,
एक नयी उम्मीद का दे कर सहारा।

श्रीमती मुक्ता सिंह
रंका राज
9/5/2020

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