तिरछी नज़रों से



*तिरछी नज़रों से*
आज भी मुझे याद आते हैं वो गुजरे दिन,
तेरा आना और तिरछी नज़रों देख मुस्कराना,
फिर हौले से मुस्कराते पास से गुजर जाना,
जाने कहां गए वो सुहाने दिन ।

श्रीमती मुक्ता सिंह
रंका राज
4/5/2020

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