तिरछी नज़रों से Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps By Mukta Singh Mukta Singh May 04, 2020 *तिरछी नज़रों से* आज भी मुझे याद आते हैं वो गुजरे दिन, तेरा आना और तिरछी नज़रों देख मुस्कराना, फिर हौले से मुस्कराते पास से गुजर जाना, जाने कहां गए वो सुहाने दिन । श्रीमती मुक्ता सिंह रंका राज 4/5/2020 Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps Comments
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