दसकों का फासला
*दसकों का फासला*
दसकों का है कुछ यूं फासला
एक प्यार वो था जो नज़रों से हो जाता था
एक प्यार ये है जो तोहफों के लिए टूट जाता है।
पहले तो जुबान ना बोलती थी कुछ
नज़रें बयां कर जाती थी दिल का हाल
आज मोबाइल पे बातें करते है सारी रात
फिर भी दिलफेंक आशिक़ ही मिलते हैं हरबार।
दसकों का है कुछ यूं फासला
वो इंतजार का हर लम्हा कटता था गिन गिन
आज तो विडियो कॉल दे जाती है खबर हर पल की
प्रेमी एक दूजे के संग बैठने से भी कतराते थे जमाने से
आज तो पकड़े जाने पे कह देते है प्रोजेक्ट बना रहे थे।
पर हर आशिक़ के लिए नहीं है ये व्याख्या
कहा जाता है ना कि जो के साथ घुन भी पीस जाता है
एक सड़ी मछली पूरा तालाब गंदा कर जाता है।
इंटरनेट ने फैलाया येसा माया
कि बच्चो के साथ बूढ़े भी हो रहे छिछोरे
अपने को कह रहे जवान, जवान को बना रहे बूढ़े।
श्रीमती मुक्ता सिंह
रंका राज
30/5/2020
दसकों का है कुछ यूं फासला
एक प्यार वो था जो नज़रों से हो जाता था
एक प्यार ये है जो तोहफों के लिए टूट जाता है।
पहले तो जुबान ना बोलती थी कुछ
नज़रें बयां कर जाती थी दिल का हाल
आज मोबाइल पे बातें करते है सारी रात
फिर भी दिलफेंक आशिक़ ही मिलते हैं हरबार।
दसकों का है कुछ यूं फासला
वो इंतजार का हर लम्हा कटता था गिन गिन
आज तो विडियो कॉल दे जाती है खबर हर पल की
प्रेमी एक दूजे के संग बैठने से भी कतराते थे जमाने से
आज तो पकड़े जाने पे कह देते है प्रोजेक्ट बना रहे थे।
पर हर आशिक़ के लिए नहीं है ये व्याख्या
कहा जाता है ना कि जो के साथ घुन भी पीस जाता है
एक सड़ी मछली पूरा तालाब गंदा कर जाता है।
इंटरनेट ने फैलाया येसा माया
कि बच्चो के साथ बूढ़े भी हो रहे छिछोरे
अपने को कह रहे जवान, जवान को बना रहे बूढ़े।
श्रीमती मुक्ता सिंह
रंका राज
30/5/2020

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