सोचा तो था, गुमशुदा रास्ते

    *सोचा तो था*

सोचा तो था कि तुमसे मिलकर
हम इजहारे- मोहब्बत करेंगे
पर तुम्हारे मशरूफ रहने की अदा ने
मुझे घायल कर दिया
हमे डर है कि तुम्हारी ये अदा
कहीं तुम्हे तन्हा ना कर दे
क्यूंकि तुमपे तो मसरूफ़ रहने का
जैसे जुनून ही सवार है।


श्रीमती मुक्ता सिंह
रंका राज
25/5/2020



           *गुमशुदा रास्तों पर*
मै गुमशुदा रास्तों पर यूं बढ़ता ही जा रहा हूं
जैसे खोज रहा हूं अपनी अनमोल ख्वाहिशें
जो ना जाने कब से है मुझसे गुमशुदा और खफा
जान रहा हूं इन रास्तों की नहीं है मंजिलें
पर मेरी ख्वाहिशें दिखा रही हैं मुझे रास्ता ।

श्रीमती मुक्ता सिंह
रंका राज
25/5/2020


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