वक्त के साथ, जीना

                  *वक्त के साथ*

वक्त के साथ ये दौर भी गुजर जाएगा,
अपने आंचल से ढंक लो अरमानों को,
दुनिया ज़ख्म पे नमक छिड़कती है आजकल।

वक्त के साथ बदलते देखे हैं सभी को,
दोस्तों को भी खंजर लिए देखे हैं कभी,
अपने बेगाने हो जाते हैं वक्त के बदलते दौर में
वक्त शीर्ष को अर्श बनता है जब ।

वक्त के साथ बदलते देखे हैं चेहरे कई,
एक चेहरे पे कई चेहरे लगा लेते हैं लोग,
उदासियां का घूंघट ना ओढ़ तू ये मन,
एक दिन ये वक्त भी बदल जाएगा,
छटेंगे दुखों के बादल,सुख का सूरज भी निकलेगा ।

क्यूंकी हमने भी वक्त से सबक सीख लिया,
वक़्त के साथ हमने उड़ना सीख लिया,
बेरहम दुनिया से लड़ना सीख लिया है,
वक्त के साथ शन से
जीना सीख लिया है ।

श्रीमती मुक्ता सिंह
रंका राज
15/5/2020

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