जिंदगी है आपसे

जिंदगी है आपसे

मेरी तो जिंदगी है आपसे
आप से शुरू आप पे ही ख़तम दुनिया हमारी
मौत भी जब आएगी एक पल ठिठक मुस्कराएगी
क्यूंकि जाने की इज्जाजत की दरकार होगी आपकी,
ये दिल-ए-बादशाह लफ्जों में क्या बयान करूं,
कि आपकी मेरी जिंदगी में रुआब्दारी है कितनी,
कहते है लोग दो जिस्म एक जान है हमारी ।

श्रीमती मुक्ता सिंह
रंका राज
14/5/2020

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