वहम, दोस्ती

*वहम था मेरा*
वहम था मेरा तेरी अटूट पाकीज़ा दोस्ती का,
गुमान हो गया था अपनी खुशकिस्मती का,
हवा के झोंके ने उजाड़ डाला विश्वास हमारा
तिनके सा उड़ गया दोस्ती का रिश्ता हमारा ।

छोटा सा दोस्ती का आशियाना था हमारा,
बड़ा नाज़ था हमे तेरे दोस्ती के रिश्ते पे
हर रिश्ते से ऊपर था तेरा दोस्ताना हमारा
मेरा सब कुछ थे तुम,पर तुम तो रिश्ते निभाने लगे,
वहम पाला था मैंने मतलबपरस्त दुनिया में,
एक दिन तो बिखरना ही था।

श्रीमती मुक्ता सिंह
रंका राज
14/5/2020

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