मैंने कब कहा

    *मैंने कब कहा*
मैंने कब कहा कि तुम बेवफ़ा हो
बस समय अनुकूल नहीं थे हमारे मोहब्बत के
तुम्हारी भी लाज़िमी थी अपनी शर्मो - हया
हमारी भी लाज़मी थी जिम्मेवारियों के बंधन
ना तुम बंधन तोड़ पाए ना हम कदम बढ़ाए
बस इतनी सी थी हमरी इश्के - दास्तां

मैंने कब कहा कि तुम बेवफ़ा हो
बस परिस्थितियां बनी हमारी पैरों की बेड़ियां
मै देखता रहा तेरा आसरा,तुम देखती रही मेरा आसरा
तुमने भी सिर्फ आंखों से इजहार कर मुझे घायल किया
मैंने भी सिर्फ नज़रों से बयां कर खुद को तसल्ली दिया।

श्रीमती मुक्ता सिंह
रंका राज
19/5/2020




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