आग को मत कुरेदिये

   *राख को मत कुरेदिये*

राख को मत कुरेदिए जज़्बात सुलग जाएंगे
कहते हैं मोहब्बत की चिंगारियां बुझती नहीं
समय के साथ राख़ बन अंदर ही अंदर सुलगती रहती हैं

श्रीमती मुक्ता सिंह
रंका राज
19/5/2020


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