तुमको देखे हुए
*तुमको देखे हुए*
तुमको देखे हुए जमाने बीत गए
पर लगता है जैसे आज की ही बात हो
और पलकें बन्द कर तेरा अक्स देख लेता हूं।
तुमको देखे हुए जमाने बीत गए
पर आज भी जब उन गलियों से गुजरता हूं
वहां की हवाओं में बिखरी तेरी खुशबू समेट लेता हूं।
तुमको देखे हुए जमाने बीत गए पर
आज भी उन फिजाओं में तेरे कहकशे गूंजते हैं
और मैं उन कहकशों में तेरी शिकायतें सुन लेता हूं।
तुमको देखे जमाने बीत गए पर
आज भी जब गुजरता हूं तेरी गलियों से
तुझे देखने की चाह में ठिठक सा जाता हूं पर
अब उन गलियों में ना तो कोई अधखुली सी खिड़कियां है
ना ही सहेलियों से गप्पे लड़ाती गुजरती हुई तेरी तिरछी निगाहें।
और मैं इन गलियों से घायल दिल समेट लाता हूं ।
श्रीमती मुक्ता सिंह
रंका राज
23/5/2020
*कुछ qoutes*
*छुप नहीं सकते तुम*
छुप नहीं सकते तुम चाहे लाख डाल लो परदे
मै वो हवा का झोंका हूं तुम्हे हौले से छू जाता हूं।
*ये ठंडी हवा का झोंका*
ये ठंडी हवा का झोंका जैसे तेरा पैग़ाम लाया हो
तुझे छू कर तेरी खुशबू को मेरे पास ले आया है।
तुमको देखे हुए जमाने बीत गए
पर लगता है जैसे आज की ही बात हो
और पलकें बन्द कर तेरा अक्स देख लेता हूं।
तुमको देखे हुए जमाने बीत गए
पर आज भी जब उन गलियों से गुजरता हूं
वहां की हवाओं में बिखरी तेरी खुशबू समेट लेता हूं।
तुमको देखे हुए जमाने बीत गए पर
आज भी उन फिजाओं में तेरे कहकशे गूंजते हैं
और मैं उन कहकशों में तेरी शिकायतें सुन लेता हूं।
तुमको देखे जमाने बीत गए पर
आज भी जब गुजरता हूं तेरी गलियों से
तुझे देखने की चाह में ठिठक सा जाता हूं पर
अब उन गलियों में ना तो कोई अधखुली सी खिड़कियां है
ना ही सहेलियों से गप्पे लड़ाती गुजरती हुई तेरी तिरछी निगाहें।
और मैं इन गलियों से घायल दिल समेट लाता हूं ।
श्रीमती मुक्ता सिंह
रंका राज
23/5/2020
*कुछ qoutes*
*छुप नहीं सकते तुम*
छुप नहीं सकते तुम चाहे लाख डाल लो परदे
मै वो हवा का झोंका हूं तुम्हे हौले से छू जाता हूं।
*ये ठंडी हवा का झोंका*
ये ठंडी हवा का झोंका जैसे तेरा पैग़ाम लाया हो
तुझे छू कर तेरी खुशबू को मेरे पास ले आया है।



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