मां
*मां*
*मेरी मां*
मेरी मां अनूठी और निराली है,
मेरे बिन बोले ही सारी बातें सुन लेती है।
अपने गुस्से में भी आशीर्वाद देती है ।
*सुनो मां*
सुनो मां तेरी चरणों में स्वर्ग है
मेरी जिंदगी तो तेरी कर्ज है
मिटा या सवार ये तेरी मर्ज है।
*मेरी मां कहती है*
मेरी मां कहती है तू है सबसे न्यारा,
पर मै कहती हूं मां से नहीं है कोई प्यारा,
खुद गम सह, हमे मरहम लगाती है,
बच्चे की चोट पे मां की जान निकल जाती है।
श्रीमती मुक्ता सिंह
रंका राज
10/5/2020
*मेरी मां*
मेरी मां अनूठी और निराली है,
मेरे बिन बोले ही सारी बातें सुन लेती है।
अपने गुस्से में भी आशीर्वाद देती है ।
*सुनो मां*
सुनो मां तेरी चरणों में स्वर्ग है
मेरी जिंदगी तो तेरी कर्ज है
मिटा या सवार ये तेरी मर्ज है।
*मेरी मां कहती है*
मेरी मां कहती है तू है सबसे न्यारा,
पर मै कहती हूं मां से नहीं है कोई प्यारा,
खुद गम सह, हमे मरहम लगाती है,
बच्चे की चोट पे मां की जान निकल जाती है।
श्रीमती मुक्ता सिंह
रंका राज
10/5/2020



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