इश्क साहिल बन गया (ग़ज़ल)
आज पहली बार एक *ग़ज़ल* लिखने का प्रयास की हूं।और आशा करती हूं कि आलोगों को पसंद आएगी।जो भी भूल चूक हो माफ़ करेंगे🙏
*इश्क साहिल बन गया*
दिल ए दर्द जब हद से गुजरा तो दवा बन गया
जिंदगी में तूफ़ान इतने उठे की इश्क साहिल बन गया ।
मोहब्बत के समंदर में सुना है आजकल तूफ़ान उठा है
इश्क की लहरें भी आजकल साहिल से मिलने आती हैं
और आकर साहिल से टकरा कर मायूस लौट जाती हैं।
एक वक्त वो था कि इश्क की दर पे हम सजदा किया करते थे
और वो बेपरवाही से हमारी हालत पे हमदर्दी जताया करते थे।
आज हम इश्क की गलियों से थोड़े निर्मोही क्या हुए
कि सुना है हुस्ने वफा इश्क की गलियों में अश्क ए फूल बिखेरते हैं
और भूले से अगर कोई हमारा नाम क्या ले लेता है
भीगी पलकों से इश्क के रंज ए सफ़र में तन्हाइयों से सर फोड़ लेते है ।
श्रीमती मुक्ता सिंह
रंका राज
10/6/2020
*इश्क साहिल बन गया*
दिल ए दर्द जब हद से गुजरा तो दवा बन गया
जिंदगी में तूफ़ान इतने उठे की इश्क साहिल बन गया ।
मोहब्बत के समंदर में सुना है आजकल तूफ़ान उठा है
इश्क की लहरें भी आजकल साहिल से मिलने आती हैं
और आकर साहिल से टकरा कर मायूस लौट जाती हैं।
एक वक्त वो था कि इश्क की दर पे हम सजदा किया करते थे
और वो बेपरवाही से हमारी हालत पे हमदर्दी जताया करते थे।
आज हम इश्क की गलियों से थोड़े निर्मोही क्या हुए
कि सुना है हुस्ने वफा इश्क की गलियों में अश्क ए फूल बिखेरते हैं
और भूले से अगर कोई हमारा नाम क्या ले लेता है
भीगी पलकों से इश्क के रंज ए सफ़र में तन्हाइयों से सर फोड़ लेते है ।
श्रीमती मुक्ता सिंह
रंका राज
10/6/2020

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