कुछ तो बात होगी

    "कुछ तो बात होगी"

कुछ तो बाते रहीं होंगी
तेरे रूठने की मेरे मनाने की
मेरे रूठने की तेरे मनाने की
और "छोटी -छोटी" बातों पे
यूंही चुपके से मुस्कराने की ।

माना साथ हमारा है, जन्मों जन्मों का
पर हर वो पल उन जन्मों पे भारी है
जब सिर्फ तुम मेरे साथ रहते हो
क्यूंकि अगला जन्म किसने देखा है
कुछ तो बात है "तेरे- मेरे" साथ में, यूंही नहीं।

कुछ तो बात होगी "तेरे - मेरे" साथ की
लोग यूंही "बाह - बाह" नहीं कहते
डरती हूं जमाने के खामोश निगाहों से
क्यूंकि वो खामोशियों तले खंजर छुपाए बैठे हैं।

कुछ तो बात होगी हमारे "अफसाने" की
लोग यूंही नहीं,"नज़ीर" देते हमारे प्यार की
डरती हूं जमाने कि रुसवाइयों से
वो अक्सर चांद में भी दाग ढूंढ़ लेते हैं ।

कुछ तो हिसाब होगी हमारे इश्क ए समन्दर की
लोग यूंही नहीं आ जाते हैं, नापने गहराई हमारे मोहब्बत की
कुछ तो बात होगी,लोग यूंही नहीं.....।


श्रीमती मुक्ता सिंह
रंका राज
10/6/2020











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