बड़े अरमानों से
कुछ सपने जब बिखरते हैं यूं तो हाल बड़ा बुरा होता है।पर हर टूटने में ही हिम्मत भी होती है।बस ढूंढने की जरूरत है।
#बड़े अरमानों से#
बड़े अरमानों से आए थे तेरे कुच्चे में
खुद तो आए थे ही दोस्तों को भी ले आए थे तेरे दर पे।
अरमानों की महफिलें सजी थी तेरी गलियों में
और खुशियों के फव्वारे उठ रहे थे तेरे देहरियों पे।
सखियों से घिरी छुई मुई सी चल रही थी तुम ऎसे
जैसे सितारों के तार सी छेड़ रही हो दिल के तमन्नाओं को।
बड़ी मुश्किल से संभाला था मैंने दिल को
जो बल्लियों उछल उछल बता रहा था हाले ए दिल सभी को।
सारी रस्में भी हो रही थी,साथ मैं भी हो रहा था तेरा सात फेरों में
सपने भी हजारों बुने थे मैंने उस हवन कुंड की अग्नियों से।
और तुम्हे अपने सपनों की मल्लिका बना चला था नई दुनिया बसाने
पर मै था हकीकत से दूर सुहाने सपनों के बुने अपने ही जाल में।
सारी रस्में भी बनी थी गवाह हमारे गठबंधन की
पर तूने एक लम्हे में मेरे दिल के अरमानों को इस कदर तोड़ा
कि यमराज भी मुरीद हो गए तेरे इस अनदेखी कत्ल ए आम से।
टूटे दिल को लिए फिर रहा हूं आज मारा मारा इस क़दर
कि अपनी सिसकियों को भी छुपा रखा है जमाने से बंद दरवाजों के पीछे।
और तू मेरा दिल तोड़ मुस्करा रही थी इस कदर
जैसे मिल गया हो कोई खजाना खुशियों का
और मै सबसे छुपा रहा था तेरी मुस्करहाटों का सबब।
पर तूने कम आंका था मेरे जज्बे को
क्यूंकि एक तू ही नहीं बेदर्द इस जमाने में
आजकल तेरी यादों को समेट थोड़ा खुदगर्ज हो गया हूं
विश्वास पे भी विश्वास करता हूं ठोक बजा कर।
आखिरी में आज पुछता हूं तुझसे बस एक सवाल
क्या मिला था तुझे, यूं मुझे दीवाना बना दिल तोड़ देने में
जब तू थी किसी और की अमानत
तो क्यों हवाएं दे रही थी, तुम मेरे इश्क ए आग को।
श्रीमती मुक्ता सिंह
रंका राज
13/6/2020
#बड़े अरमानों से#
बड़े अरमानों से आए थे तेरे कुच्चे में
खुद तो आए थे ही दोस्तों को भी ले आए थे तेरे दर पे।
अरमानों की महफिलें सजी थी तेरी गलियों में
और खुशियों के फव्वारे उठ रहे थे तेरे देहरियों पे।
सखियों से घिरी छुई मुई सी चल रही थी तुम ऎसे
जैसे सितारों के तार सी छेड़ रही हो दिल के तमन्नाओं को।
बड़ी मुश्किल से संभाला था मैंने दिल को
जो बल्लियों उछल उछल बता रहा था हाले ए दिल सभी को।
सारी रस्में भी हो रही थी,साथ मैं भी हो रहा था तेरा सात फेरों में
सपने भी हजारों बुने थे मैंने उस हवन कुंड की अग्नियों से।
और तुम्हे अपने सपनों की मल्लिका बना चला था नई दुनिया बसाने
पर मै था हकीकत से दूर सुहाने सपनों के बुने अपने ही जाल में।
सारी रस्में भी बनी थी गवाह हमारे गठबंधन की
पर तूने एक लम्हे में मेरे दिल के अरमानों को इस कदर तोड़ा
कि यमराज भी मुरीद हो गए तेरे इस अनदेखी कत्ल ए आम से।
टूटे दिल को लिए फिर रहा हूं आज मारा मारा इस क़दर
कि अपनी सिसकियों को भी छुपा रखा है जमाने से बंद दरवाजों के पीछे।
और तू मेरा दिल तोड़ मुस्करा रही थी इस कदर
जैसे मिल गया हो कोई खजाना खुशियों का
और मै सबसे छुपा रहा था तेरी मुस्करहाटों का सबब।
पर तूने कम आंका था मेरे जज्बे को
क्यूंकि एक तू ही नहीं बेदर्द इस जमाने में
आजकल तेरी यादों को समेट थोड़ा खुदगर्ज हो गया हूं
विश्वास पे भी विश्वास करता हूं ठोक बजा कर।
आखिरी में आज पुछता हूं तुझसे बस एक सवाल
क्या मिला था तुझे, यूं मुझे दीवाना बना दिल तोड़ देने में
जब तू थी किसी और की अमानत
तो क्यों हवाएं दे रही थी, तुम मेरे इश्क ए आग को।
श्रीमती मुक्ता सिंह
रंका राज
13/6/2020

👌👌
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