ख्वाबों के घेरे में

  नमस्कार,जोहार, खम्मागन्नी सा,अभिनंदन 🙏
आज मैं उन प्रेमियों के दिलों की भावनाओं को व्यक्त करने की एक छोटी सी कोशिश की हूं।जो कर्तव्य पथ पे अग्रसर होने के लिए न चाहते हुए भी चलते हैं।ऐसे में एक प्रेमिका के उलाहना भरे शब्दों को चित्रित करने का प्रयास की हूं।और मुझे आशा है कि आपलोगों को पसंद आएगी।


*ख्वाबों के घेरे में*

अधूरे मोहब्बत के ख्वाबों के घेरे में तुम मुझे छोड़ जाते हो,
साथ मिलता है बमुश्क़िलों से, कर्तव्यों के पथों पे हाथ छोड़े जाते हो,
फिर जल्दी मिलूंगा का दिलासा दिए आशाओं के घेरे में छोड़े जाते हो ।

पर अब जिम्मेवारियों का घेरों का दायरा होने लगा है बड़ा,
मंजिलों के सफ़र में अब तन्हाइयां बनने लगी हैं हमसफ़र तेरे,
और हमसफ़र के सफ़र में विरह का लगने लगा है मेला ।

इस मेले के भीड़-भाड़ में चारों ओर तन्हाइयों का कुछ यूं पहरा है,
जिधर देखूं बस उधर मुस्कराता दिखता है तेरा ही चेहरा ,
उस चेहरे को छूने की कोशिश, तेरे दूर जाने की अनुभूति है ।

अनुभूतियों का तो क्या कहना है अब, बिन बुलाए सैलाब से उमड़ते हैं,
और अपनी वेग में हमें भी, तेरी यादों के समंदर में डुबो जाते हैं,
तेरी यादों का समंदर भी तो इतना गहरा है,
कि एक बार डूब जाऊ, तो सुध न रहती जमाने की ।

अधूरे मोहब्बत के ख्वाबों के घेरे में, कर्तव्यों के पथ पे मुझे छोड़ जाते हो,
वादों के भरोसे यादों को बना आशियाना मेरा
,प्यार का घरौंदा बना जाते हो
सारे जमाने से वफ़ा निभाने को, अपने इश्क़ की स्मृतियों का घेरा डाले जाते हो ।

श्रीमती मुक्ता सिंह
रंकाराज
22/6/2020


Comments

  1. कुछ चीज़ों का अधूरापन ही उनकी पूर्णता है।
    ये अपना अलग चार्म बनाए रखते हैं।
    बहुत बढ़िया 🙏🙏🙏

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