यादों के भंवर से

   *यादों के भंवर से*

चलो आज यादों के भंवर से
कुछ मुस्कराहट मांग लाते हैं ।
जब हमे ना थी
दुनियादारी की समझ
सब अपना और सभी अपने
दिलों को लुभाते थे
उस पल को मांग लाते हैं ।

चलो आज यादों के भंवर से
कुछ मुस्कराहट मांग लाते हैं ।
और उन पलों के, ख्वाबों को सजाते हैं
चलो एक बार फिर से उन
अल्हड़ मस्तियों को ओढ़ आते हैं।

चलो आज यादों के भंवर से
कुछ मुस्कराहट मांग लाते हैं ।
कुछ तीखी कुछ नमकीन
वो दोस्तों का रूठना- मनाना
झूठी वो मनुहार भरी लड़ाई
फिर से वो दोस्ताना ढूंढ़ लाते हैं।

चलो आज यादों के भंवर से
कुछ मुस्कराहट मांग लाते हैं ।

श्रीमती मुक्ता सिंह
रंका राज
8/6/2020



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