सदियों का इंतज़ार
आज मैंने अपने ब्लॉग को एक पत्नी के इंतज़ार की मनोदशा को समर्पित किया है।जो कोई भी हो सकती है।एक सोल्जर कि पत्नी, एक विदेश में बसे की देश में इंतज़ार करती पत्नी, एक प्रवासी की पत्नी जिसका पति कई महीनों बाद घर लौट रहा हो।या वो जो पति - पत्नी दोनों रोजी रोटी के लिए अलग अलग शहर में रह रहे हों, कई दिनों बाद, कई महीनों बाद पति घर आ रहा हो।आशा है कि मै एक पत्नी की उस इंतज़ार की मनोदशा को चित्रित करने में खरी उतरी होऊं आप सभी के सामने।🙏
*सदियों का इंतज़ार"
सदियों का इंतजार जब एक दिन में बदल जाता है,
तो सदियां छोटी और एक दिन बड़ा हो जाता है,
दिल की धड़कने तेज यूं हो जाती हैं,
कि हरेक आहट पे नज़रें बस देहरी निहारती है ,
और लगता है जैसे ख्वाबों पे भी इंतज़ार का पहरा है
एक खटके पे दिल बल्लियों उछल जाता है।
सदियों का इंतजार जब एक दिन में बदल जाता है,
तो सदियां छोटी और एक दिन बड़ा हो जाता है,
सदियां तो काट ली मैंने दिन गिन - गिन कर,
पर अब एक दिन पे, एक पल भी भारी हैं,
काश कि तुम ये संदेशा ना भेजे होते,
कि मै कल आ जाऊंगा सांझ ढलते - ढलते।
सदियों का इंतजार जब एक दिन में बदल जाता है,
तो सदियां छोटी और एक दिन बड़ा हो जाता है,
आज मैंने चुनरी भी निकाली है तेरे पसंद कि,
उसे पहन कई बार आइने में भी देख आई हूं,
फिर बावरी बन खुद से ही पूछती हूं सौ सवाल,
कहीं इतने दिनों में तुम्हारी पसंद तो ना बदली होगी,
फिर मुस्करा देती हूं सोच वो तेरा मुस्कराता चेहरा,
चल पगली बावरी ना बन, पसंद भी कभी बदलते हैं क्या ।
सदियों का इंतजार जब एक दिन में बदल जाता है,
तो सदियां छोटी और एक दिन बड़ा हो जाता है,
आज मैंने पूरा घर तेरी यादों से सजाया है,
पूरे घर में खुशबू भी घुल रही तेरे पसंद की पकवानों से,
देहरी पे रंगोली भी सजाई है, कलश भी रखा है,
आरती की थाली में दिए भी है लगाए,अपने प्यार के,
इस बार ना था तू यहां सुहाग के पूजे में,
बस आधुनिकता का सहारा ले कर ली थी पूजा,
आज तेरी आरती कर होगी पूरी, मेरी अधूरी पूजा ।
जिन सभी त्योहारों पर तुम दूर रहे मुझसे
आज सभी उत्सव साथ - साथ मिलकर मनाएंगे ।
सदियों का इंतजार जब एक दिन में बदल जाता है,
तो सदियां छोटी और एक दिन बड़ा हो जाता है।
श्रीमती मुक्ता सिंह
रंका राज
9/6/2020
*सदियों का इंतज़ार"
सदियों का इंतजार जब एक दिन में बदल जाता है,
तो सदियां छोटी और एक दिन बड़ा हो जाता है,
दिल की धड़कने तेज यूं हो जाती हैं,
कि हरेक आहट पे नज़रें बस देहरी निहारती है ,
और लगता है जैसे ख्वाबों पे भी इंतज़ार का पहरा है
एक खटके पे दिल बल्लियों उछल जाता है।
सदियों का इंतजार जब एक दिन में बदल जाता है,
तो सदियां छोटी और एक दिन बड़ा हो जाता है,
सदियां तो काट ली मैंने दिन गिन - गिन कर,
पर अब एक दिन पे, एक पल भी भारी हैं,
काश कि तुम ये संदेशा ना भेजे होते,
कि मै कल आ जाऊंगा सांझ ढलते - ढलते।
सदियों का इंतजार जब एक दिन में बदल जाता है,
तो सदियां छोटी और एक दिन बड़ा हो जाता है,
आज मैंने चुनरी भी निकाली है तेरे पसंद कि,
उसे पहन कई बार आइने में भी देख आई हूं,
फिर बावरी बन खुद से ही पूछती हूं सौ सवाल,
कहीं इतने दिनों में तुम्हारी पसंद तो ना बदली होगी,
फिर मुस्करा देती हूं सोच वो तेरा मुस्कराता चेहरा,
चल पगली बावरी ना बन, पसंद भी कभी बदलते हैं क्या ।
सदियों का इंतजार जब एक दिन में बदल जाता है,
तो सदियां छोटी और एक दिन बड़ा हो जाता है,
आज मैंने पूरा घर तेरी यादों से सजाया है,
पूरे घर में खुशबू भी घुल रही तेरे पसंद की पकवानों से,
देहरी पे रंगोली भी सजाई है, कलश भी रखा है,
आरती की थाली में दिए भी है लगाए,अपने प्यार के,
इस बार ना था तू यहां सुहाग के पूजे में,
बस आधुनिकता का सहारा ले कर ली थी पूजा,
आज तेरी आरती कर होगी पूरी, मेरी अधूरी पूजा ।
जिन सभी त्योहारों पर तुम दूर रहे मुझसे
आज सभी उत्सव साथ - साथ मिलकर मनाएंगे ।
सदियों का इंतजार जब एक दिन में बदल जाता है,
तो सदियां छोटी और एक दिन बड़ा हो जाता है।
श्रीमती मुक्ता सिंह
रंका राज
9/6/2020

Superb 👌
ReplyDeleteBahut badhiya 👌
ReplyDeleteWah bahut hi sunder
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