तेरी चाहत

       नमस्कार🙏 जोहर🙏 खम्मागन्नी सा☺️🙏

आज का विषय है तेरी चाहत।मुहब्बत का रिश्ता एक पाक साफ रिश्ता होता है।जिसे इबादत की तरह पूजा जाता है।एक महबूब का साथ जन्नत से लगता है।साथ उसको रुषवाईयों से डर भी लगता है।और भलाई चाहने के लिए दो कदम पीछे भी हटने पड़ते है।आशकरती हुन की आपसभी को पसन्द आएगी ये ग़ज़ल🙏


                 *तेरी चाहत*
तेरी चाहत आजकल मेरी जियारत हो गयी है,
तू है अनमोल अहसास मेरा,धड़कनो की इबादत हो गयी है।

वी तेरी निश्छल सी हंसी और पीछे से आकर छू लेना,
वो अदा,ओ पल मेरे लिए जैसे जन्नत सी हो गयी है।

हमारे इश्क के चर्चे अब शामो-सहर आम हो गयी है,
हमारी गुफ़्तगू की खबरें अब महफिलों की जान हो गयी है।

तेरी मोहब्बत का नशा यूँ है मुझपर,मैं कुछ कहता भी नही ,
और जमाने में इसकी गहराइयों की खबर-ए-आम हो गयी है।

दिल डरता है ज़माने की रुसवाइयोंसे,क्योंकि फरिश्ते सा दिल है तेरा,
कहीं मेरी आशिक़ी, जला न दे चिलमन तेरा, ऐ डर सुबह-शाम हो गयी है।

तुम तो रब की कबूल दुआ हो मेरी,सादगी पे तेरे दाग ना लगे कभी,
ये सोच बढ़ता कदम रोक लेता हूँ, और तेरी नाराजगी नशे-ज़ाम हो गयी है।

श्रीमती मुक्ता सिंह
रंका राज
16/7/2020




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