किसी और की
"किसी और की"
"रहते हो मेरी पहलुओं में
दिल में किसी और की तस्वीर छुपाए"
निगाहों से देखते हो मुझे
और चेहरे में अक्स ढूंढते हो किसी और की।
बेरुखियों का अब तो आलम है इतना
की हम तुम्हे निहारते हैं अपलक
और तुम सो जाते हो,
नैनों में किसी और की याद बसाये।
वो कुछ दिनों की मुलाकातें
ज्यादा गहरी थी, मेरे रिश्ते से
उसकी मासूमियत अच्छी थी
हमारे बचपने से ।
ओ यादें, ओ मुलाकातें, ओ बातें
आज भी बेचैन करती हैं तुझे इस क़दर
कि उसकी गलियों में हो आते हो
चुपचाप आंखे मूंद कर ।
जिक्र भी कोई छेड़ दे कहीं
तो चेहरे पे यादों की
मुस्कान खिल जाती है
नज़रें चुराते हो सबसे
पर चेहरा हाले-बयां कर जाती है।
भूले से नाम दिख जाए कहीं तो
घर का पता ढूंढ लेते हो
इसीलिये तो लोग कहते हैं
की सच्चे प्यार की निशानी है ये
मुहब्बत हो अधूरी पर कहानी हो पूरी।
"रहते हो मेरी पहलुओं में
दिल में किसी और की तस्वीर छुपाए"
श्रीमती मुक्ता सिंह
रंका राज
26/6/2020
"रहते हो मेरी पहलुओं में
दिल में किसी और की तस्वीर छुपाए"
निगाहों से देखते हो मुझे
और चेहरे में अक्स ढूंढते हो किसी और की।
बेरुखियों का अब तो आलम है इतना
की हम तुम्हे निहारते हैं अपलक
और तुम सो जाते हो,
नैनों में किसी और की याद बसाये।
वो कुछ दिनों की मुलाकातें
ज्यादा गहरी थी, मेरे रिश्ते से
उसकी मासूमियत अच्छी थी
हमारे बचपने से ।
ओ यादें, ओ मुलाकातें, ओ बातें
आज भी बेचैन करती हैं तुझे इस क़दर
कि उसकी गलियों में हो आते हो
चुपचाप आंखे मूंद कर ।
जिक्र भी कोई छेड़ दे कहीं
तो चेहरे पे यादों की
मुस्कान खिल जाती है
नज़रें चुराते हो सबसे
पर चेहरा हाले-बयां कर जाती है।
भूले से नाम दिख जाए कहीं तो
घर का पता ढूंढ लेते हो
इसीलिये तो लोग कहते हैं
की सच्चे प्यार की निशानी है ये
मुहब्बत हो अधूरी पर कहानी हो पूरी।
"रहते हो मेरी पहलुओं में
दिल में किसी और की तस्वीर छुपाए"
श्रीमती मुक्ता सिंह
रंका राज
26/6/2020

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