यादों की उठी है आंधी

     #यादों की उठी है आंधी#


आज यादों की उठी है ऐसी आंधी

कि नयनों की अश्रु बरसात बनी है

मन का मौसम सर्द बड़ा ठिठुरता सा

अहसासों की गर्माहट लाऊं कहां से

तुम भी यूं बिन बात नाराज़ हुए मुझसे

बन बैठे किसी और के आंगन की बहारें

मेरा जीवन पतझड़ के सूखे पत्तों सा बना के।


आज यादों की उठी है ऐसी आंधी

कि नयनों की अश्रु बरसात बनी है

आज भी सुनता हूं मुहब्बत के गीत कहीं

तुम बादलों सा घिर जाते हो मेरे इर्द-गिर्द

और यादों की बूंदे बरसाते हो दर्द बनके


आज यादों की उठी है ऐसी आंधी

कि नयनों की अश्रु बरसात बनी है

खोजो-ख़बर भी अब हुआ दूभर

नाराज़ ना जाने तुम किस बात से हुए

सोचा प्यार न सही,दोस्त ही बन जाऊं तेरे

पर तुम खुश हो किसी और की दुनिया बसा के

मैं लुटा सा बैठा हूँ आशिक,दोनो जहां से जा के

ना मुझे तुम्हारा प्यार मिला,ना दोस्ती के क़ाबिल रहा ।


आज यादों की उठी है ऐसी आंधी

कि नयनों की अश्रु बरसात बनी है।


श्रीमती मुक्ता सिंह

रंका राज

15/8/2020

Comments

  1. एक बार दिल चाहता है भुला देना मगर जुनूँ सौ बार याद दिला देता है....
    याद ऐसी ही चीज़ होती है।
    बहुत अच्छा

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