हुक़ूक़-अधिकार
हुक़ूक़ - अधिकार
तेरे जाने के बाद भी मेरे दिल-ए-चमन में तेरा ही हुक़ूक़ है
लाख चाहा तेरी यादों को भुलाना,पर धड़कनों को कोई कैसे भुलाए
हम मिले भी थे और नहीं भी मिले,हकीकतों की दुनिया में
बस नज़रें मिली हमारी,और मेरी जिंदगी तेरे नाम हो गयी
हमारा प्यार शब्दों का मोहताज़ ना था,बस अहसासों का साथ था
तू भी जानती थी,मैं सिर्फ तेरा हूं, तो दिल मे किसी और को क्यों बसाया
जमाने की रीती-रिवायतें में आज हम अलग राह के राही हैं
मेरा दिल तेरे लिए ही धड़कता है,ये और बात है कि हमसफ़र कोई और है
पर शुरुआत भी तो तूने ही कि थी, कितना दिल रोया था उस दिन फुट-फुटकर
नफ़रत सी हो गयी थी,उन दरों-दीवारों से,उन गलियों,उस शहर से
जहाँ तूने मेरे दामन को ठोकरों में रख,ताज पहनाया था किसी और को
तूने ठुकराया मुझे,पर आज भी मेरी धड़कनों में तेरा ही बसेरा है ।
श्रीमती मुक्ता सिंह
रंका राज
8/9/2020

👌👌👌👌👌
ReplyDeleteVery nice line 👌
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