किसान
आज मै किसानों के ऊपर एक प्रतियोगिता के तहत कविता लिख रही हूं।और आशा करती हूं कि ,कम शब्दों में किसान का चित्रण करने में मैं सफल रही हूं🙏जोहार, नमस्कार,खम्मागन्नी सा🙏
*किसान*
ठिठुरती ठंढ, कड़कती धूप,गरजती बारिश
जब हम अपनों के संग देहरी भीतर प्रफुल्लित होते
तब किसान कंधों पे हल ले जोड़े बैलों को पुचकारता
इंद्र देव को मनाता, धरती से करता प्रार्थना,बीजों करता जोड़-घटाव
चल पड़ता कर्मयोगी, हर विपदा से लड़ने को तैयार
बिना विश्राम करते निरन्तर काम,जाने किस मिट्टी के बने
हमारे उदर को भरने वाले खुद भूखा महंगाई की मार में सो जाते
कभी अकाल,कभी टिड्डी,कभी खर-पतवार की भेंट चढ़ती मेहनत
फिर भी उफ ना करते,धरती माँ से प्रेम जो इतना करते
कभी-कभी बच्चों के दुःख से विचलित हो फांसी के फंदे को अपनाते
बस अब बस हो,देश की इन जवानों के दुखों का अंत हो
ये हमारा संकल्प हो,अब अन्नदाता का धरा पे मान होना चाहिए
श्रीमती मुक्ता सिंह
रंका राज
10/9/2020

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