हिंदी भारत माता की लाडली

 नमस्कार,जोहार, खम्मागन्नी सा🙏

आज हिंदी दिवस के अवसर पे मैं ये रचना प्रस्तुत कर रही हूं।और आशा करती हूं कि आपसबों को भी पसंद आएगी।इसमें मैने थोड़े आक्रोश और सम्मान की बात सम्मिलित रूप से रेखांकित करने का प्रयास की हूं।


"हिन्दी भारत माता की लाडली"


14 सितम्बर क्या आया चहुंओर

अचानक से शोर बढ़ी हिंदी दिवस-हिंदी दिवस

बस एक दिन की मुख्य अतिथि की तरह हो रहा सत्कार

बाकी दिनों तो अंग्रेजी का है बोलबाला हरओर

सभ्य गिने जानेवाले समाज भी अंग्रेजी में गपियाते

हिंदी को हेय दृष्टि से देख पास भी न फटकाते

शान समझते बेझिझक अंग्रेजी में बकबकाना

हिंदी भाषी को अछूतों के समूह में रख, मुंह हैं बिचकाते।


पर हम हिंदुस्तानियों की हिंदी ही है पहचान

क्या हुआ जो देर लग रही बहुचर्चित होने में

जब भी जय हिंद बोलेंगे, हिंदी का बढ़ेगा मान

हम हर रिश्तों को अलग-अलग नामो से हैं पुकारते

क्योंकि हर रिश्ते की अपनी मर्यादा,अपना है सम्मान

मां में है ममता का सागर तो पिता में है प्यार उमड़ता

अंग्रेजी तो रिश्तों की मर्यादा ही खो देती

एक ही शब्द के कितने अर्थ-अनर्थ है बनाती

नमन लाल बहादुर शास्त्री जी को,जो इसकी अस्मिता की लड़े लड़ाई

आज भी हिंदी दूर खड़ी किसी कोने में उन्हें याद कर

आंखों में सागर और होठों पे मुस्कान लिए मुस्कराती होगी ।


क्यों विशेष दिन हम दें हिंदी को सम्मान,जब पलप्रतिपल हो साथ

कितनी समृद्ध,कितनी मधुर है इसकी वाणी

स्वर-व्यंजना सभी इसके हैं मनुहारी,सबका है अपना मान

ऐसे ही नही देवभाषा ये कहलाती,संस्कृत की लाडली

वैदिक ऋचाओं या हो कवियों की हो कवितामाला

मीरा, तुलसी , महादेवी,हरिश्चंद्र हो या निराला

प्रेमचंद,पन्त, वच्चन, हरिशंकर हो या दिनकर

सबको भाती ये हमारी मातृभूमि भारती की लाडली बाला

जय भारत, जय हिंदी,जय हिंद🙏


श्रीमती मुक्ता सिंह

रंका राज

14/9/2020






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