इश्क़

 इश्क़

नमस्कार🙏जोहार🙏खम्मागन्नी सा🙏।आज मैं आपके समक्ष इश्क़ कुछ बातों को थोड़े शब्दों में परिभाषित करने का प्रयास की हूं।और आशा करती हूं कि आपको पसंद आएगी।




#इश्क़#


ये इश्क़,

हमारी जिन्दगी की बंदिगी है

कैसे बताऊं की ये क्या है

ये गुलाबी सर्द सी,शर्म से सिमटी 

गंगा सी निर्मल,निश्छल,रागों की सरगम

राधा सी समर्पण,भावनायों की पूंजी है।


इश्क़ में, 

सुना है लोग बिखर के निखर जाते हैं

और अधूरे रह कर भी मुकम्मल हो जाते हैं

जो तू नही तो दोस्तों की महफिलों में भी 

तन्हाइयों का आलम है

साथ हैं तो बस हम और तेरी यादें।


इश्क़ की बातें,

तुमसे बताना बहुत कुछ था मिलकर 

पर समय की बेरहमी का हुआ ऐसा असर

मिलने से पहले ही तुम हुए यूं बेरहम

कि सुननेवाला बस मैं और मेरी तनहाइयाँ थी।



इश्क़ की, 

राहों में खतरे अनजानी-जानी पहचानी सी

दोस्तों की भीड़ में दुश्मनों के कई चेहरे हैं

जिम्मेवारियों के कसौटियों के लगे मेले हैं

आओ हम अलग होकर भी राधाकृष्ण बन जाते हैं।



श्रीमती मुक्ता सिंह

रंकाराज

4/10/2020









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