सूर्य घेरे में ‘22 डिग्री सर्कुलर हलो’

 

*झारखण्ड के कई हिस्सों में सूर्य घेरे में नज़र आये*

झारखण्ड के रांची समेत कई जिलों के आज लोगों का कौतूहल का विषय रहा ।सूरज के चारों ओर घेरा।कई लोग इसे सोशल मीडिया पे पोस्ट कर अलग-अलग शंकाएं जता रहे हैं, कुछ वीडियो कॉल के जरिये अपनो को ये नज़र दिखाते हुए तस्वीरें पोस्ट की। तो कुछ लोग इस महामारी के कोरोना कसल में सूर्य को भी आइसोलेट मान रहे हैं।वही कुछ लोग पोसिटिव सोच के साथ यह कह रहे हैं कि अब कोरोना खत्म होने वाला है।इसलिए भगवान सूर्यदेव सुरक्षा सुदर्शन चक्र बना रहे हैं।

अब चलिए इसके असली तथ्य को हम सामने लाते हैं।जो हमने नेट से साभार लिया है।यह पहली खगोलीय घटना नही है।इसके पहले भी कई जगहों पे कई बार दिख चुकी है।2013 में,2016 में कोलकोता में, 2020 में सिंगापुर में।
यह एक खगोलीय घटना है, इसे सूर्य या कुछ मौकों पर चंद्रमा का ‘22 डिग्री सर्कुलर हलो’ कहा जाता है।

अब सवाल ये उठता है कि क्या है ये  ‘22 डिग्री सर्कुलर हलो’।तो हम बता दें कि इसे मून रिंग या विंटर हेलो के नाम से जाना जाता है। एमपी बिरला प्‍लैनेटेरियम के एक सीनियर शोधकर्ता के अनुसार ऐसा तब होता है जब सूर्य या चंद्रमा की किरणें सिरस क्‍लाउड (वैसे बादल जिनकी परत काफी पतली और महीन होती है और जिनका निर्माण प्राय: 18 हजार फीट ऊपर होता है) में मौजूद हेक्‍सागोनल आइस क्रिस्‍टल्‍स से विक्षेपित हो जाती हैं।
साथ ही उनके अनुसार 'इस तरह के सिरस क्‍लाउड का निर्माण तब होता है जब पृथ्‍वी की सतह से करीब पांच से 10 किलोमीटर ऊपर जलवाष्‍प, आइस क्रिस्‍टल्‍स में संघनित हो जाते हैं। ठंडे देशों में यह नजारा आम बात है। लेकिन हमारे देश में इसका होना काफी दुर्लभ है और इसका अनुमान नहीं लगाया जा सकता है।


मौसम विभाग रांची ने भी इसे हेलो (ग्रीक हालोस्स) के रूप में पुष्टि की है। उनके अनुसार यह प्रकाश द्वारा उत्पादित प्रकाशीय घटनाओं के एक परिवार का नाम है (आमतौर पर सूर्य या चंद्रमा से) वायुमंडल में निलंबित बर्फ के क्रिस्टल के साथ किरणों के परावर्तित होने से ऐसा दृश्य उत्पन्न होता है। हेलोस के कई रूप हो सकते हैं, जिसमें रंगीन या सफेद रिंग से लेकर आर्क्स और आकाश में धब्बे होते हैं। इनमें से कई सूर्य या चंद्रमा के पास दिखाई देते हैं, लेकिन अन्य कहीं या आकाश के विपरीत हिस्से में भी होते हैं। सबसे प्रसिद्ध प्रभामंडल प्रकारों में वृत्ताकार प्रभामंडल (ठीक से 22 ° प्रभामंडल कहा जाता है), प्रकाश स्तंभ और सूर्य के कई धब्बे होते हैं। इनमें से कुछ काफी सामान्य होते हैं, जबकि अन्य दुर्लभ हैं।

श्रीमती मुक्ता सिंह
रंकाराज
26/4/21




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