एक नए रिश्ते में बंध जाऊं

 *आ एक नए रिश्ते में बंध जाऊं तुझसे*


रंगों का रंगीला त्योहार है

खुशियों का मौका मिला है

आ तेरे कंधे पे सर रख आंखे बंद कर 

खुशियों की जहां पा लूं मां

तेरे हंसते-मुस्कराते-दमकते चेहरे की

कुछ आभा में जी लूं चुपके से मां

तू तो प्यार की सागर है

इसकी गहराई में गोते लगा लूं मां

और भावनाओं की मोती को

आ जज़्बातों के पिटारे में छुपा लूं मां

रिश्तों की मर्यादा को सीमाओं ने बंधा है

आ एक नए रिश्ते में बंध जाऊं तुझसे मां।


मां की लोरी सुनी बचपन में

प्यार भरा डांट भी खाया था कभी उनसे

फिर फिक्र की झपकियों से सुलाई थी वो

सब बातों को आज तेरे कन्धे पे सर रख

आंखे मूंद नए रिश्ते गढ़ लूं तुझसे मां

सर पे पल्लू रख पलकें झुका मान रखा मैने

आ आज तुझसे बेटी बन लाड़-दुलार पा लूं मां

आ एक नए रिश्ते में बंध जाऊं तुझसे मां।


अहसास कई हैं दिल में,व्यक्त करने को मचलते

सीमायों में बंधे शब्द आस देखते हैं सदियों से

आ आज उन शब्दों को सुर दे भवनाएं उड़ेलूँ मां

आ एक नए रिश्ते में बंध जाऊं तुझसे मां ।


श्रीमती मुक्ता सिंह

रंकाराज

7/4/21





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