यादों की महफ़िल

 #यादों की महफ़िल#


रात के नीरव में यादों की महफ़िल सजती हैं

इन खामोशियों के जंगल मे तेरी हंसी गूंजती हैं


मन उदास है मेरा,ये बीते लम्हों जरा बहला दो

महबूब मेरे अब किसी की ज़िंदगी बन गए हैं


जरा ये हवा उसे छू कर आ,और मुझे सराबोर कर

बेवफ़ा कैसे कहूं ,वक़्त ने जुदा किया हमको


बेकरार सिर्फ मैं ही नही,तुम भी बेचैन होते थे

गवाह है वो बीते लम्हें,जो गुजारे साथ हमने


अफसोस है,प्यार का इज़हार ना कर सके हम

फिर भी शिकायत नही रब से,क्योंकि 

महबूब मेरा खुश है,अपने नए जहां में


ये अलग बात है कि हम खामोश तड़पते हैं 

उनकी यादों की बरात सजा कर तन्हाइयों में


श्रीमती मुक्ता सिंह

रंकाराज

17/6/21




Comments

  1. Feeling wala lines
    Very nice

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  2. Bohut badhiya💝💝💝💝algaw hai magar koi shikayat nahi...... Bohut umda💓💓💓💓💓🙏🏻🙏🏻🙏🏻

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  3. 👌👌👌bht khub...heart touching ❤️❤️

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