लौट कर आना ही होगा
#लौट कर आना ही होगा#
वक्त के बेरहम काल की यूँ पड़ी नज़र
मेरे दिल का टुकड़ा जुदा हो गयी मुझसे
जिसे पलकों पे बिठाये रखा था मैंने
सतरंगी फूलों के बिछौने पे सुलाया था मैंने
जाने कहाँ से पतझड़ आया चुपके से
मेरे बगिया को वीरान कर गया तुफानो से
मैं तो ख़्वाबों के सावन के झूले में
लिए बैठी थी अपनी लाडो को छुपाए
इंद्रधनुषी रंगों की डोली सजाए
द्वार पे बन्दनवार लगाए,शहनाई को सजाए
जाने किसकी लगी नज़र,
उजड़ गया खुशियों का चमन मेरा
अब तो आंसुओं की लगी है झड़ी हरपल
ख्वाब टूटे, दिल टूटा,फिर भी हैआसरा
एक दिन रौशन होगा हमारा जहाँ
लौट कर तुम्हे आना ही होगा
जो यूँ रूठ कर गए हो ,चुपके से जहाँ से
मेरी ममता के आंचल में फिर से
मासूम सी मेरी राजकुमारी मुस्कराना ही होगा।।
श्रीमती मुक्ता सिंह
रंकराज
30/10/21

Always beautiful writing 🥰🙏🏻
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