ऑंसूयों के सागर में तुफानो का सैलाब है

 #ऑंसूयों के सागर में तूफानों का सैलाब है#


रूह के रिश्ते, ज़ज़्बातों का अहसास

सब रौशन थे तेरी हंसी की फुलवारी में


त्योहारें आती रहेंगी,जाती रहेंगी

पर अब ना उमड़ेगी उमंगों की लहर


बस अब ऑंसूयों के सागर में है

तूफानों के सैलाबों का बसर


बाहर दिये की लरज़ती रौशनी का साम्राज्य

रंगों की अठखेलियाँ करती मुस्कराती रंगोली

हंसते-खिलखिलाते तुम्हारे दोस्तों की टोली


पर मेरी देहरी उदास राह देख रहा तेरी

ना दियों का साथ,ना खिली है रंग-बिरंगी रंगोली

बस उमंगों के साम्राज्य में उदासियों का डेरा है


वक़्त के क्रूर मज़ाक के ठहाकों की गूंज से 

अब मेरा मन सहमा सा छुप रहा 

जिम्मेवारियों के दहलीज़ भीतर


कोशिशों की कश्ती में बिन पतवार चल रही

उम्मीदों के दिये को तूफानों से बचाती

कहीं से मिल जाती तेरी झलक और 

चुम लेती तेरे आत्मविश्वास से भरे माथे को


और तुम नखरे दिखाती 

प्यारी सी आवाज़ में कहती

अरे यार मम्मी क्यों हो उदास ,मैं यहीं तो हूं ।।



श्रीमती मुक्ता सिंह

रंकाराज

4/11/21






Comments

  1. रूह के रिश्ते, ज़ज़्बातों का अहसास

    सब रौशन थे तेरी हंसी की फुलवारी में



    त्योहारें आती रहेंगी,जाती रहेंगी

    पर अब ना उमड़ेगी उमंगों की लहर intense n hearttouching 💖💖💖💖

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