तस्वीरें देख अहसासों को जीना है
#तस्वीरें देख अहसासों को जीना है#
तेरी तस्वीर जब भी देखती हूँ
अहसासों की लहरें बेताब हो उठती हैं
प्रयासों की पतवार थामे आगे बढ़ती हूं
तब ही यादों का तूफान आ घेर लेता है
कभी डैडी,कभी मम्मी को आलिंगन कर
बांध रही थी तुम सुनहरे ख़्वाबों के आसमां में
अनजाने में सज़ा रही थी बड़े प्यार से
यादों के घरौंदों को,बीते लम्हों के ख़ज़ाने से
वक़्त की लगी ऐसी नज़र,फ़ना हो गयी
खुशियां पल में,धीमी हो गयी हमारी नब्ज़
हमारी खुशियों की मंज़िल थी तुम
हमारा स्वाभिमान,गर्व थी तुम मेरी लाडली
बहुमूल्य अनोखे बंधनों की गवाह
तेरी तस्वीरे गुजरे लम्हों की इबादत हैं
जहाँ हो खुश रहो,शायद ईश्वर को
मुझसे ज्यादा जरूरत थी तुम्हारी
अब तेरी यादों से ही लाड लड़ाएंगे
तुम भले ही चली गयी मुझे छोड़कर
पर मेरी धड़कनों से कैसे जा पाओगी
तेरे बिना जीती हूं,कर्तव्यों को निभाने को
अब तस्वीरे देख,अहसासों को जीना है
शिकायतों का पुलिंदा है,इंतज़ार का अंधेरा है
दिल में दर्द, होठों पे मुस्कराहट का पहरा है
आसरे की देहरी पे,तेरी आहटों की उम्मीद है
श्रीमती मुक्ता सिंह
रंकाराज
9/11/21

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