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"अबला नहीं अब नारी"

   "अबला नहीं अब नारी" मैथलीशरण गुप्त जी की यह कविता- "अबला जीवन हाय तुम्हारी यही कहानी, आँचल में दूध, आँखों में पानी।" बहुत सरे मायने में अब भी सटीक बैठती है।पर अब जरुरत है बदलाव की, क्योंकि समाज भी अब आगे आने लगा है आधी आबादी के साथ।और मै कहती हूँ- अब अबला नहीं है नारी , ना ही है दया की पात्र, ना ही है पुरूषो की छाया मात्र, न ही है अब  किसी पर आश्रित। सक्षम है, शिक्षित है अब आधी आबादी, समाज को है अब उनपे पूरा विश्वाश, हर क्षेत्र में चल रही समाज के साथ, रावण बने नर अब तुम भय खाओ, क्योंकि समाज कृष्न बन दे रहा साथ। भरी सभा में अब न लूटेगी मर्यादा , न होगा सीताहरण, क्योंकि समाज कृष्ण बन दे रहा साथ, अब नहीं है नारी अबला, ना उपेक्षा की पात्र, जग रही नारी शक्ति, जग रहा समाज।                            ..........📝श्रीमती मुक्ता सिंह

मासूम सवाल

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     *मासूम सवाल* जब भी राजनीती की रोटी सिकती है सड़कों पे, आफत टूटती है सबसे ज्यादा बच्चों पे, बच्चे भूख- प्यास से रहते हैं बेहाल, और विकास की झूठी राजनीती करते हैं नेता, इनसे है मेरा बस एक ही सवाल ? क्या मैदान कम पड़ गए राजनीती के लिए, क्या सड़को पे होगा हंगामा,तभी होगा विकास, इनके पास न है कोई मुद्दा, फिर भी हैं सड़के घेरे। हंगामा करने वालो, एक नज़र तो डालो मासूमों पे, जब आप होंगे रजाइयों में दुबके,ऐसी में बैठे, उस समय ये मासूम निकले होंगे अपनी कर्मभूमि को, शायद नाश्ता भी न किया होगा ढंग से, मन में होगा बस एक ही डर, कहीं छूट न जाये बस, आठ घंटे बाद लौटे हैं ,अपनी खुशियाँ ढूंढने, माँ का आँचल,गर्म खाना, परिवार का प्यार पाने । पर आपको क्या इन सब बातों से, आपको तो करनी है अपनी राजनीती, मासूम रहे परेशान, आपको तो करना है जाम, सड़क पे होगा हंगामा, तभी आपको मिलेगी पहचान। इस ड्यूटी पे लगे प्रशाशन से करो जब सवाल, प्रशाशन मज़बूरी के नाम पे है पल्ला झाड़ती, कहती है हम हैं मजबूर वर्दी पे लगे अशोक स्तम्भ से। नन्ही सी आँखे,मासूम चेहरे पर है एक ही सवाल, क्या है...

लोकतंत्र के शशक्तिकरण में युवाओं का योगदान

लोकतंत्र के शशक्तिकरण में युवाओं का योगदान 🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹          लोकतंत्र के शशक्तिकरण में युवाओं का बहुत ही योगदान हो सकता है । क्योंकि युवा शक्ति किसी भी देश और समाज की रीढ़ होती है, साथ ही यही युवाशक्ति चाहे तो देश और समाज को नए शिखर पर ले जा सकती है ।क्योंकि युवा देश के वर्तमान के साथ- साथ भूतकाल और भविष्य के सेतु भी हैं ।एक ओर जहाँ युवा देश और समाज के जीवन मूल्यों के प्रतीक हैं, तो वहीँ यही युवा गहन ऊर्जा और उच्च महत्वकांक्षाओं के साथ भविष्य के इंद्रधनुषी स्वप्न के अकांछी होते हैं ।किसी भी देश के समाज को बेहतर बनाने और राष्ट्र के निर्माण में सर्वाधिक योगदान युवाओं का ही होता है ।              संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत सबसे बड़ी युवा आबादी वाला देश है। यहाँ के लगभग 60 करोड़ लोग 25 से 30 वर्ष के हैं। यह स्थिति वर्ष 2045 तक बनी रहेगी। विश्व की लगभग आधी जनसंख्या 25 वर्ष से कम आयु की है । इसलिए हमारा देश भारत अपनी बड़ी युवा जनसंख्या के साथ देश को अर्थव्यवस्था की नई ऊंचाई पर ले जा सकता है ।...

सोने की पायल पाजेब

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      "सोने की पायल" सोने की पायल हाँ सोने पायल या पाजेब, बचपन से थी अंकित मानस पटल पर, जाने कहाँ देखी थी वो सुन्दर सी पायल, शायद कहीं पढ़ी हो किसी कहानियों में, या उपन्यास की नायिका की पैरों में खनकी हो, या देखा था शायद किसी फ़िल्मी नायिका के पैरों में। न जाने उसमे थी कैसी आकर्षण, वह सुनहला सा लिपटा पैरों में, उसकी घुँघरुओं की धुन गूंजती थी कानो में, ढेर सारी घुँघरुओं की छन-छन, उन घुँघरुओं की धुन में न जाने थी कैसी मिठास, जो कोयल से भी मीठी धुन घोलती थी कानो में। तभी किसी ने बताया की उसे तो कहते हैं पाजेब, पायल तो होती है पतली सी, तभी सहसा दिखी आजी की बक्से में, उसकी वो झलक थी कितनी मोहक, वो चौड़ी सी घुँघरुओं से भरी, छोटी-छोटी घुंघरू एक लय में थे गुंथे सारे, एक बार हवा में झनझोरने से बज उठे सारे, उसकी उस आवाज में न जाने थी क्या जादू। यह सोने की पाजेब मन को बड़ा लुभाता है, पिया के दिल को बांधती है इसकी छनक, इसकी एक छनक छेड़ जाती है मन के तार, जैसे बज रही हो सारे सरगमों की झंकार, यही पाजेब की आवाज बताती है पहचान, कि घूँघट में लिपटा आ रहा है कौन, प...

ऐसे भी होते हैं औलाद

             "ऐसे भी होते हैं औलाद"            आज बहन के घर जाते हुए, उसके मोहल्ले में एक आलिशान भवन पे नज़र पड़ी। उसकी सुंदरता हम निहार ही रहे थे की बरामदे में एक बुजुर्ग की दयनीय हालात देख नज़र जैसे ठिठक सी गई।मै उनके बारे में ही सोचते हुए की वो कौन थे? बहन के घर दाखिल हुई।          अंदर जाकर मै बच्चों बड़ों से मिलकर बातों में भूल गई। और इधर-उधर की बातें होने लगी। इसी बातचीत के क्रम में उस मकान की भव्यता की भी चर्चा होने लगी। तभी मेरी बहन बोली क्या फायदा ऐसा आलिशान मकान बनवाने से ,जब मकान बनवाने वाले की हालात आज भिखारियों सी हो। मैंने पूछा उनकी ये हालात कैसे हो गई? तभी मेरी बहन बताने लगी की बेचारे वो बुजुर्ग सालभर पहले सीसीएल से रिटायर हुए हैं। उनका एक ही एकलौता बेटा-बहु और एक पोता है। अभी 6 महीने पहले ही धर्मपत्नी गुजर गई हैं। बेचारे ने बहुत चाव से घर बनवाया था रहने के लिए ,पर एक कमरा तो क्या एक चारपाई भी उन्हें नसीब नहीं है। पत्नी के गुजरने के बाद दूध लाना, सब्जी लाना , बच्चे को लाना और भी नो...

ज़िन्दगी में जूनून

       "ज़िन्दगी में जूनून" ज़िन्दगी में जरुरी है जूनून, जैसे मछली के लिए जल, जीवन के लिए साँस, कामयाबी के लिए प्रयास, सफलता के लिए आत्मविश्वास। परिवार के लिए रिश्ते, खुशियों के लिए विश्वास, दुखों से निबटने के लिए साहस, सब एक जूनून ही तो हैं । क्योंकि दोस्तों किसी ने सच ही कहा है- "यूँ ही नहीं मिलती राही को मंजिल, एक जूनून दिल में जगाना जरुरी होता है।" चिड़ियाँ से पूछो कैसे बनाया आशियाना ? भरनी पड़ती है उसे बार-बार उड़ान, तिनका-तिनका होता है उसे उठाना, तब बनता है उसका आशियाना। ये जूनून ही था थॉमस अल्वा एडिसन का, 1000 बार असफलता के बाद भी न मानी हार, इतनी असफलता के बाद किया बल्ब का आविष्कार।                   ............📝श्रीमती मुक्ता सिंह